पीतांबरा माता दतिया, संपूर्ण जानकारी

जैसा कि आप जानते है की संपूर्ण भारतवर्ष में आदि शक्ति देवी माँ के विभिन्न मंदिर और तीर्थ स्थल है जो की कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक फैले हुए है।  आज हम आपको उन्ही में से एक प्रमुख धाम माता बगलामुखी जो की दतिया (मध्य प्रदेश ) में स्थित है की बारे में में सपूर्ण जानकारी देने जा रहे है , इस पवित्र तीर्थस्थल को आम जन माता पीताम्बरा की नाम से भी जानते है जिसकी ख्याति दूर दूर तक फैली हुई है।  देवी पीताम्बरा एक  प्रसिद्द शक्तिपीठ है जिसकी ख्याति विश्वविख्यात है और यहाँ लाखों श्रद्धालु देश विदेश से यहाँ माता के दर्शन के लिए आते है। 

बगलामुखी जयंती: तंत्र पीठ का एहसास करवाता, संसार का एकमात्र मंदिर - shri pitambara  peeth
Peetambara Mata Statue

ऐसा कहा जाता है की इस मंदिर में एक विशेष तरह के भक्त बहुतायत संख्या में आते है जो राजनीतिक सत्ता का भोग अनुभव करना चाहते है।  ऐसा विश्वास है की यहाँ मन से मांगी हुई मुराद अवश्य पूरी होती है एवं राजनीती से लेकर फ़िल्मी हस्तियां इस मंदिर के दर्शन करने आते है। यहाँ माता पीताम्बरा के साथ ही मंदिर में एक तरफ माता धूमाबती का भी प्रसिद्द मंदिर स्थित है जिसके भक्त देश के कोने कोने से यहाँ दर्शन करने आते है।

पीतांबरा माता दतिया का इतिहास

भक्तों के बीच में इस मंदिर की बढ़ती श्रद्धा और विश्वास यहाँ आने वाले यात्रियों की संख्या दिन पर दिन बाद रही है।  इस मंदिर की स्थापना का श्रेय श्री तेजस्वी स्वामी जी को जाता है जिन्होंने इस मंदिर की आधारशिला सन १९३५ में रखी थी।  उससे पहले यहाँ देवी के होने के कोई साक्ष्य या प्रमाण देखने को नहीं मिलते न ही देवी के किसी अवतार या प्रकट होने की कथा यहाँ प्रचलित है।  ऐसा मान जाताहै की स्वामी तेजस्वी जी की प्रेरणा से ही इस मंदिर में चतुर्भुज रूप में माता पीताम्बरा की मूर्ती स्थापना हुई। चतुर्भुजी देवी के एक हाथ में गदा दूसरे हाथ में पाश तीसरे हाथ में बज्र और चौथे हाथ में दैत्य की जीब है।

यहाँ आने वाले प्रत्येक श्रद्धालु के मन में देवी माँ के लिए विशेष श्रद्धा है और उन्हें संपूर्ण विश्वाशोता है की यहाँ आकर उनके बिगड़े काम जरूर बन जाते है।  इसीलिए यहाँ नियमित तौर पे लोग दूर दूर से दर्शन करने आते है।  यहाँ माता बगलामुखी के दर्शन एक छोटी सी खिड़की से किये जाते है यहाँ कभी भी श्रद्धालुओं को देवी माँ की प्रतिमा के सामने खड़ा होने का अवसर नहीं मिलता और किसी को भी माँ पीताम्बरा को छूने की इजाजत नहीं है।

जिस प्रकार की माता पीताम्बरा का नाम है उसी प्रकार इनका श्रृंगार भी हमेशा पीले वस्त्रों में होते है और इन्हे पीले रंग के फूल ही अर्पण किये जाते है एवं माँ के वस्त्र भी पीले रंग के ही होते है , यहाँ आने वाले श्रद्धालु माँ को भोग भी पीले रंग के मिष्ठान ही लगाते है अतः जो लोग राजनीती में सत्ता सुख एवं धन की प्राप्ति के लिए भक्त माता पीताम्बरा का पूजन विधि विधान से करते है। 

पीतांबरा माता दतिया कैसे पहुंचे?

पीताम्बरा माता का विशाल मंदिर मध्य प्रदेश राज्य के दतिया शहर में स्थित है जो की झाँसी रेलवे स्टेशन से मात्रा ४० किलोमीटर है दिल्ली से मुंबई जाने वाले रुट की सभी रेल यहाँ होकर गुजरती है जहाँ उतरकर टैक्सी या बस द्वारा आप माता पीतांबरा के दर्शन के लिए जा सकते है। बहुत सी अन्य ट्रैन यहाँ सीधे भी आती है जहाँ रैलवे स्टेशन पर उतरकर आप सीधे दतिया धाम तक पहुँच सकते है। 

अगर आप हवाई मार्ग से होते हुए यहाँ आना चाहते है तो यहाँ का निकटतम हवाई अड्डा ग्वालियर है जो की मात्र ९० किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। कई बड़े शहर जैसे की आगरा, झाँसी, ग्वालियर से आप सीढ़ी टैक्सी बुक करके भी यहां पहुंच सकते है  

पीताम्बरा के दर्शन से पहले की जरूरी जानकारी –

वैसे तो साल में सभी वर्ष माता पीताम्बरा के दर्शन के लिए दरबार खुला रहता है पर जो लोग नियमित रूप से यहाँ आते है वह यहाँ की विशेषता भी जानते है।  ऐसा माना जाता है की शनिवार के दिन यहाँ दर्शन करने से विशेष लाभ प्राप्त होता है इसीलिए किसी ख़ास महत्वाकांक्षा वाले श्रद्धालु यहाँ हर शनिवार नियमित रूप से आते है , जैसा की माता पीताम्बरा का स्वरुप है उन्हें पीले रंग के ही श्रृंगार में देखा जाता है और भक्त ऐसा मानते है की उन्हें पीले रंग से अधिक स्नेह है इसलिए भक्त यहाँ पीले रंग के लड्डू , पीले रंग के वस्त्र और पीले रंग के फूल माता पीताम्बरा को अर्पण करते है।

Pitambara Peeth Datia Timings, Aarti Timings, History, Location - पीताम्बरा  पीठ दतिया

मंदिर में जाने पर आपको दो लाइन लगी हुई मिलती जिसमे एक तरफ महिलाये एवं दूसरी तरफ पुरुष होते है जैसे जैसे लाइन आगे j है आप देवी के  दर्शन एक छोटी सी खिड़की द्वारा कर सकते है।  

धूमावती माता दतिया , मध्य प्रदेश

माता पीताम्बरा के विशाल मंदिर में ही एक तरफ विराजमान माता धूमावती का मंदिर बना हुआ है धूमावती माता दतिया एक बहुत ही प्रसिद्द धार्मिक स्थल है जिन्हे शक्ति रूपा देवी के रूप में भक्त पूजते है यहाँ देवी का एक विशेष रूप पको देखने को मिलता है जैसा की अन्य जगह कश्मीर से कन्या कुमारी तक सिर्फ देवी काली को छोड़कर आपको सभी देवी स्वरुप विवाहित नारी रूप में पुरे श्रृंगार के साथ सुसज्जित रहती है एवं हमेशा रंग बिरंगे लहंगे एवं परिधानों में सजकर बैठती है लेकिन यहाँ धूमावती माता में आपको माता का एक विभिन्न रूप देखने को मिलेगा जहाँ देवि आपको एक मैली सी सफ़ेद साड़ी खुले हुए घने बाल बिखेरे एक कौवे की ऊपर बैठी हुई दिखती है जो की उनकी सवारी स्वरूप है। आपको देवी का ऐसा विचित्र रूप पहली दफा देखने पर आश्चर्य प्रकट होगा लेकिन बाद मे आपको पता चलेगा की वास्तव में देवी का यह रूप एक विधवा स्त्री का रूप है जिसे माँ धूमावती के नाम से जाना जाता है।

एक बात और ख़ास है की धूमावती माता के दर्शन सप्ताह में एक दिन सिर्फ शनिवार को ही करने को मिलता है बाकि के अन्य दिन यह मंदिर आम नागरिकों के लिए बंद रहता है। जिस प्रकार देवी का स्वरुप है ठीक उसी प्रकार उनका भोग प्रसाद यहाँ लगाया जाता है। जैसे कि अपने देखा होगा की अन्य देवी मंदिरो में मॉस मदिरा सहित प्याज से बने खाने या प्रसाद वर्जित होते है पर यहां देवी धूमा मति में लोग प्याज के पकोड़े प्रसाद स्वरुप देवी को चढ़ाते है।ऐसा माना जाता है की तंत्र मात्रा में आस्था रखने वाले भक्त भी देवी धूमावती में विशेष आस्था रखते  है    

दतिया (मध्य प्रदेश) के प्रसिद्द दार्शनिक स्थल

1.गोविंद देव जी मंदिर दतिया

माता पीताम्बरा मंदिर से लगभग १ किलोमीटर की दूरी पर बना हुआ गोविन्द देव जी का मंदिर दतिया का एक प्रसिद्द तीर्थ स्थल है यहाँ मंदिर भगवान् श्री कृष्णा को समर्पित है एवं नित्य नियम रूप से यहाँ सुबह शाम भगवान्मू श्री कृष्णा की पूजा अर्चना की जाती है यह मंदिर बहार से एक पुराने भवन के जैसा प्रतीत होता है एवं अंदर से रंग बिरंगे काँचो से सुसज्जित भवन में गोविन्द जी पधारे है। यहाँ जन्मास्टमी के अवसर पर विशेष आयोजन होते है।

2. दतिया क़िला

दतिया का किला अपने आप में एक अनूठा क़िला है जिसे राजा वीर सिंह जे देव द्वारा सन १६०२ में बनवाया गया था ये क़िला बहुत ही भव्य है और ७ मंजिल ऊपर तक बना हुआ है ऐसा माना जाता है की इस क़िले के अहाते में भी ठीक उसी प्रकार सात मंजिल बनी हुई है जैसे की ऊपर के भवन में। इस क़िले की हर मंजिल पर बेहतरीन वास्तुकला का उद्धरण देखने को मिलता है।  जहाँ जालियां और छज्जों पर बेहतरीन कटाई करके उन्हें एक सुन्दर रूप में ढाला गया है। यहाँ से समस्त शहर का अनूठा नजारा देखने को मिलता है 

3.सीता सागर दतिया –

सीता सागर दतिया माता पीताम्बरा मंदिर के समीप बसा हुआ अत्यंत शांतिप्रिय दार्शनिक स्थल है जो की एक छोटी सी झील के रूप में विधमान है यहाँ अक्सर कर आम श्रद्धालु और पर्यटक देवी पीताम्बरा दर्शन के बाद विश्राम करने आते है।  यहाँ बैठकर आपको सुकून प्राप्त होगा एवं ये जगह इसलिए भी प्रसिद्द है की इस झील के समीप आपको दतिया के अन्य प्रसिद्द पर्यटक स्थल घूमने के लिए सभी तरह के वाहन आसानी से उपलब्ध होते ह।  यहाँ आपको खाने पीने के भी ढेरों स्टाल्स मिल जाते है जहाँ पर आप चाय, नास्ता और अन्य तरह के लोकल पकवानो का लुत्फ़ उठा सकते है

4.रतनगढ़ माता मंदिर दतिया

रतनगढ़ माता का मंदिर दतिया का एक विशेष धार्मिक स्थल है जहाँ देश के विभिन्न हिस्सों से लोग दर्शन करने आते है। यह मंदिर दतिया शहर से लगभग ५० किलोमीटर की दूरी पर स्थित है यहाँ का वातावरण बहुत ही प्राकर्तिक है और माता का भवन घने जंगलों के बीच सिंधु नदी के तट पर बसा हुआ है। हर वर्ष दिवाली की दौज पर यहाँ भक्तों का तांता लगता है और रतनगढ़ माता के मंदिर पर विशेष आयोजन होते है। यहाँ पहुंचने के लिए आपको दतिया से सीधे वाहन उपलब्ध है और लगभग एक घंटे की यात्रा के बाद आप इस पवित्र स्थान पर पहुँच सकते है।

5. भैरव नाथ मंदिर दतिया –

भैरव नाथ जी का मंदिर दतिया कएक सुप्रसिद्ध स्थल है जहाँ सभी नगरवासी बटुक भैरव नाथ जी की नित्य नियम से पूजा अर्चना करते है एवं उनके आशीर्वाद से अपने व्यापार एवं रोज़गार में तरक्की करते है।  पीताम्बरा मंदिर से लगभग ५०० मीटर की दूरी पर बसा हुआ इस मंदिर को लोगबाग मंदिर के नगर कोतवाल के नाम से भी जानते है ऐसा माना जाता है की दतिया स्थित भैरव नाथ जी मंदिर दतिया शहर की रक्षा करने के लिए रात दिन तत्पर रहते है।  इस मंदिर पर पहुँचने के लिए आपको पीताम्बरा मंदिर के सामने से ही वाहन उपलब्ध है अथवा आप पैदल चलकर भी आसानी से यहाँ पहुँच सकते है।

6. सोनागिरी 

दतिया से लगभग १३ किलोमीटर की दूरी पर स्तिथ है सोनागिर जो की जैन धर्म का एक मुख्या तीर्थ स्थल है , यहाँ आकर जैन धर्म के अनुयायी जैन धर्म का पालन करने की शिक्षा लेते है एवं अपने गुरुओं के बताये हुए नियमों का पालन करने की शिक्षा प्राप्त करते है।  यह स्थल एक पहाड़ी के ऊपर बसा हुआ है ऐसा माना जाता है की यहाँ पहले 108 जैन मंदिर हुआ करते थे जिनमे की क्रम अनुसार ५७ वा मंदिर मुख्या तीर्थ स्थल है जो की वर्तमान समय में सिर्फ ५७ के करीब ही देखने लायक अवस्था में है। सोनागिरि में आचार्य शुभचन्द्र एवं महान जैन गुरु ऋषि भार्तिहरी जी ने निर्वाण पाया था और वह जीवन और मरण के बंधन से छूटकर मोक्ष को प्राप्त हुए थे।  अतः यह मंदिर और यहाँ आके तीर्थ स्थल “दिगंबर सम्प्रदाय ” के प्रमुख तीर्थ स्थल है।  ऐसा माना जाता है की यहाँ करोड़ों लोगो ने इस पवित्र स्थल पर आकर निर्वाण प्राप्त किया है।  यहाँ ठहरने के लिए आपको बहुत ही अच्छी अच्छी धर्मशालाए उपलब्ध है एवं बारिश के मौसम में यहाँ का वैभव और वातावरण अत्यंत रमणीक प्रतीत होता है अगर आप दतिया आते है तो इस पवित्र स्थल पर दर्शन करने का लाभ जरूर उठाये।  

7. राजगढ़ पैलेस दतिया

राजगढ़ पैलेस दतिया की एक अमूल्य धरोहर है जिसे विरासत में मिले एक अनूठे उपहार के रूप में ये शहर संजोये हुए है। राजगढ़ पैलेस ३५० वर्ष पुराण एक शाही महल था जो की आज कालांतर में अपनी जर्जर अवस्था में दतिया शहर के बीचो बीच बसा हुआ है पर आज भी इसकी  भव्यता देखते ही बनती है इतिहासकार बताते है की एक समय पर यहाँ राजा का दरबार लगता था और यहाँ पर मध्य प्रदेश राज्य से जुड़े हुए कार्यभार संपूर्ण किये जाते थे। 

बाद में भारत सरकार ने भी कुछ वर्षो तक यहाँ कचहरी लगने की इजाजत दी थी और ये राजगढ़ कोर्ट के नाम से मशहूर हुआ। वर्तमान में ऐसा सुना जा रहा है की राजगढ़ पैलेस को किसी प्रमुख होटल चैन ने भारत सरकार से कुछ वर्षों के लिए लीज़ पर ले लिया गया है और जल्द ही यहाँ एक सुविधाजनक होटल खुल सकता है जिससे यहाँ आने वाले पर्यटक इस वैभवशैली महल के इतिहास से रूबरू हो सकते है।  

8. वनखंडेश्वर महादेव दतिया

वनखंडेश्वर महादेव मंदिर दतिया का सबसे ऐतिहासिक शिव मंदिर है ऐसा माना जाता है कि ये मन्दिर पहले उस स्थान पर स्थित था जहाँ आज वर्तमान में माँ पीताम्बरा स्थित है ऐसा कहा जाता है की स्वामी जी महाराज जिन्होंने माँ पीताम्बरा की स्थापना की वो पहले वनखंडी महादेव पर ही भगवान् शिव की घोर आराधना करते थे और शिव की आराधना करने के साथ ही उन्होंने यहाँ माँ पीताम्बरा की स्थापना की थी।  इस मंदिर का इतिहास महाभारत काले है और इसे यहाँ के राज परिवार भी शुरुआत से पूजते आये है।  यहाँ हर वर्ष श्रवण मॉस और महा शिवरात्रि के अवसर पर विशेष आयोजन किये जाते है और लाखों भक्त महादेव के दर्शन के लिए इस स्थान पर आते है।   

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